दो शब्द
अंग्रेजी में अपना चिट्ठा लिखते-लिखते थक गया था. भई, अब बात तो सीधी-साधी है, जब अंग्रेजी में सोचता ही नहीं तो काहे उस बेचारी की टांग तोडूं. खैर, अब देवनागरी लिखने की विद्या का पता लग गया है और समस्या सुलझ गयी है तो देर कैसी? जल्दी ही कुछ सार्थक लिखने का प्रयास करूँगा. और हाँ, विशेष प्रोत्साहन के लिये पुराने और धुरंधर चिट्ठाकार मिश्रा जी को धन्यवाद.
